विस्तृत उत्तर
मंदिर में पूजा के लिए वस्त्र के संबंध में धर्मशास्त्रों में स्पष्ट नियम हैं:
मनुस्मृति (4.34-35) और पद्म पुराण का सामान्य निर्देश
पूजा में शुद्ध, धुले हुए, और सात्विक वस्त्र पहनने चाहिए। अशुद्ध, फटे, या मैले वस्त्र पूजा में वर्जित हैं।
पुरुषों के लिए
- ▸धोती (सर्वोत्तम): पूजा के लिए धोती — विशेषतः पीली या सफेद — सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। कच्छाबंध धोती (पाँव के बीच से लगाई गई) अधिक शुद्ध।
- ▸कुर्ता-पायजामा: सामान्य पूजा के लिए स्वीकार्य।
- ▸सिले कपड़े (stitched): मंदिर में सिले वस्त्र भी स्वीकार्य हैं — यद्यपि यज्ञ आदि में बिना सिले की परंपरा है।
- ▸उत्तरीय (चादर/अंगवस्त्र): कंधे पर अंगवस्त्र रखना श्रेयस्कर है।
महिलाओं के लिए
- ▸साड़ी (सर्वोत्तम): पीली, लाल, या सफेद साड़ी सबसे शुद्ध मानी जाती है।
- ▸सलवार-कमीज/कुर्ती: स्वीकार्य परंतु सिर ढका होना चाहिए।
- ▸नीले और काले वस्त्र: अधिकांश परंपराओं में पूजा में वर्जित — तामसिक रंग माने गए हैं।
रंग का महत्व (अग्निपुराण)
- ▸पीला — सर्वश्रेष्ठ, विष्णु-पूजा के लिए विशेष
- ▸सफेद — शुद्धता, शिव-पूजा के लिए
- ▸लाल — देवी-पूजा के लिए
- ▸केसरिया — सात्विकता का प्रतीक
- ▸नीला/काला — सामान्यतः वर्जित (विशेष तंत्र साधना में अपवाद)
अन्य नियम
- ▸पूजा में चमड़े की बेल्ट, जूते, या वस्तुएं वर्जित हैं।
- ▸पूजा के वस्त्र अलग रखें — उन्हें घर के अन्य कार्यों में न पहनें।





