विस्तृत उत्तर
गोपाल मंत्र, जिसे संतान गोपाल मंत्र भी कहते हैं, भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को समर्पित एक प्रसिद्ध अनुष्ठानिक मंत्र है। इसका मुख्य उद्देश्य संतान सुख की प्राप्ति और गर्भ की सुरक्षा है। इस मंत्र के ऋषि नारद, छंद अनुष्टुप् और देवता श्रीकृष्ण हैं। मंत्र है: 'ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।।'
मंत्र सिद्धि के लिए वैदिक शास्त्रों में एक लाख जप पूर्ण करने का विधान बताया गया है। जप के लिए स्फटिक, जीवापोता या रुद्राक्ष की माला उत्तम मानी जाती है। जप पूर्ण होने के बाद उसका दशांश अर्थात दस हजार मंत्रों से हवन करना चाहिए, और तदनंतर ब्राह्मणों को श्रद्धानुसार भोजन करा कर आशीर्वाद लेना चाहिए।
जप की विधि में पहले विनियोग करके श्रीकृष्ण के बाल रूप का ध्यान करना चाहिए। बालगोपाल की मूर्ति या चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाकर, माखन-मिश्री का भोग अर्पण करते हुए, पति-पत्नी दोनों मिलकर संकल्पपूर्वक नियमित जप करें तो शीघ्र फल मिलता है। जप काल में ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार और नियमितता अनिवार्य है। जप को बीच में अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।
जन्माष्टमी का दिन इस मंत्र के अनुष्ठान के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस मंत्र से संतान प्राप्ति की बाधाएँ दूर होती हैं, गर्भ की सुरक्षा होती है और स्वस्थ एवं गुणवान संतान का आशीर्वाद मिलता है।


