विस्तृत उत्तर
मंत्र जप में संकल्प लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है। संकल्प का अर्थ है — जप शुरू करने से पहले अपने मन में यह दृढ़ निश्चय करना कि आप किस उद्देश्य से, कितनी संख्या में और कितने दिनों तक जप करेंगे।
संकल्प की विधि
1तैयारी
- ▸स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- ▸पूजा स्थल पर आसन (कुश/ऊनी) पर बैठें।
- ▸पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
2आचमन और प्राणायाम
- ▸तीन बार आचमन करें।
- ▸तीन बार प्राणायाम करें।
3संकल्प वचन
दाहिने हाथ में जल, अक्षत (चावल), पुष्प और कुश लेकर निम्न प्रकार संकल्प बोलें:
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। अद्य (आज की तिथि, वार, मास, पक्ष बोलें) अमुक गोत्रः (अपना गोत्र बोलें) अमुक नामा अहम् (अपना नाम बोलें) श्रीशिवप्रीत्यर्थम् (या अपना विशेष उद्देश्य बोलें) ॐ नमः शिवाय मंत्रस्य (या जो मंत्र जपना हो) अमुक संख्यया (जप संख्या बोलें — जैसे सवा लाख) जपं करिष्ये।
फिर जल भूमि पर छोड़ दें।
4संकल्प में सम्मिलित बातें
- ▸जप का उद्देश्य (रोग मुक्ति, विवाह, शांति, आध्यात्मिक उन्नति आदि)
- ▸मंत्र का नाम
- ▸जप की कुल संख्या
- ▸जप की अवधि (कितने दिनों में पूर्ण करेंगे)
- ▸नियम (उपवास, ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार आदि)
5महत्वपूर्ण नियम
- ▸एक बार संकल्प लेने के बाद उसे पूर्ण करना अनिवार्य है।
- ▸बिना संकल्प के मंत्र जप अपूर्ण माना गया है।
- ▸संकल्प से मंत्र की शक्ति बढ़ती है और निश्चित फल की प्राप्ति होती है।





