विस्तृत उत्तर
घंटाकर्णेश्वर महादेव के प्रांगण में तीन साधनाओं का विशेष विधान है —
पंचाक्षरी मंत्र — रुद्राक्ष की माला पर 'ॐ नमः शिवाय' का जप। शिव पंचाक्षर स्तोत्र के भावों को मन में रखते हुए।
महामृत्युंजय मंत्र — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' — अकाल मृत्यु, मानसिक और शारीरिक रोगों पर विजय के लिए काशी में विशेष फलदायी।
नाद-अनुसंधान विधि — शिवलिंग के सामने सिद्धासन में बैठें, आँखें बंद करें। मंदिर का घंटा एक बार तीव्र आघात से बजाएँ। जब ध्वनि धीरे-धीरे क्षीण हो, तो चेतना उसके अंतिम छोर पर — जहाँ ध्वनि मौन में विलीन हो रही है — केंद्रित करें। यही बिंदु है जहाँ अनाहत नाद प्रकट होता है।
विशेष — जप वाचिक (जोर से) नहीं, उपांशु (फुसफुसाकर) या मानसिक होना चाहिए ताकि ध्वनि की सूक्ष्मता बनी रहे।





