विस्तृत उत्तर
कुछ प्राचीन ग्रंथों में यह उल्लेख मिलता है कि आग्नेयास्त्र का मंत्र 'उलटी गायत्री' या 'अनुलोप जप' है। गायत्री मंत्र जो स्वयं में परम शक्तिशाली और पवित्र माना जाता है, उसके प्रतिलोम रूप का प्रयोग एक विनाशकारी शक्ति को जाग्रत करने का प्रतीक हो सकता है। यह तथ्य आग्नेयास्त्र के ज्ञान की गूढ़ता और उसकी प्रचंड शक्ति को दर्शाता है। इस अस्त्र के प्रयोग और संहार की विधि अत्यंत गोपनीय होती थी और इसे केवल गुरु ही अपने सुपात्र शिष्य को सिखाते थे।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





