विस्तृत उत्तर
शिवलिंग पर अभिषेक के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जप की संख्या शास्त्रों में इस प्रकार वर्णित है:
निश्चित संख्या
- ▸108 बार — सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक प्रचलित। 108 अंक अत्यंत पवित्र माना गया है (27 नक्षत्र × 4 चरण = 108)। रुद्राक्ष माला में 108 मनके होते हैं — एक पूर्ण माला जप।
- ▸1008 बार — विशेष अनुष्ठान, सावन सोमवार या शिवरात्रि पर।
- ▸11 बार — न्यूनतम (एकादश रुद्र की संख्या)।
- ▸21 बार — सामान्य दैनिक पूजा में पर्याप्त।
- ▸5 बार — अत्यंत संक्षिप्त पूजा में (पंचाक्षर = 5 अक्षर)।
सतत जप — सर्वोत्तम
वास्तव में शास्त्रों का मूल भाव यह है कि अभिषेक के दौरान मंत्र जप निरंतर चलता रहे — जब तक जल/दूध/पंचामृत की धारा शिवलिंग पर बह रही है, तब तक 'ॐ नमः शिवाय' का जप जारी रखें। संख्या से अधिक भक्ति भाव और निरंतरता महत्वपूर्ण है।
विशेष अवसरों पर
- ▸महाशिवरात्रि: 1008 या 10008 बार
- ▸सावन सोमवार: 108 बार
- ▸प्रदोष व्रत: 108 बार
- ▸नियमित पूजा: 11/21/108 बार
माला का प्रयोग
रुद्राक्ष माला से जप सर्वोत्तम। स्फटिक माला भी शुभ। माला का सुमेरु (मुख्य मनका) पार न करें — लौटकर पुनः जप करें।





