विस्तृत उत्तर
घनकर्णेश्वर महादेव की पूजा शिव-आगमों के अनुसार षोडशोपचार (१६ उपचारों) से होती है। इसमें नाद-साधना का विशेष पुट है।
पहले — घंटाकर्ण हृद में स्नान या जल-मार्जन अनिवार्य है, बिना इसके दर्शन का विधान नहीं।
ध्यान — 'ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं...' मंत्र से शिव का ध्यान।
आवाहन — 'आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरो भव' मंत्र से।
पाद्य-अर्घ्य — 'महादेव महेशान महादेव परात्पर, पाद्यं गृहाण मद्दतं पार्वतीसहितेश्वर' मंत्र से जल अर्पण।
गोदुग्ध अभिषेक — गाय के कच्चे दूध की अटूट धारा से अभिषेक, साथ में रुद्र सूक्त का पाठ। मानसिक-शारीरिक रोगों की शांति के लिए विशेष महत्वपूर्ण।
भस्म-बिल्वपत्र — शिवलिंग पर भस्म का त्रिपुंड, मदार, धतूरा, शमी और बिल्वपत्र (उल्टी तरफ) अर्पण।
महा-आरती — 'करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा...' मंत्र से क्षमा-प्रार्थना।
विशेष नियम — मंदिर में मौन और श्रवण पर ध्यान, अधिक बोलना वर्जित।





