विस्तृत उत्तर
पूर्व या उत्तर मुख होकर कुश आसन पर बैठें, भस्म और रुद्राक्ष धारण करें। संकल्प लें। पंचामृत और जल से शिव का अभिषेक करें। फिर बेलपत्र को गंगाजल से शुद्ध कर, उस पर चंदन लगाकर, बिल्वाष्टकम् के श्लोकों का उच्चारण करते हुए अर्पित करें। अंत में बेल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर आरती और क्षमा प्रार्थना करें।





