विस्तृत उत्तर
चमेली (जैस्मिन) का तेल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय सुगंधित द्रव्यों में है। शिव पूजा में इत्र और सुगंधित तेल का विशेष स्थान है:
शास्त्रीय आधार
शिवलिंग पर श्रृंगार सामग्री (सिंदूर, हल्दी, कुमकुम) वर्जित है, किन्तु इत्र और सुगंधित तेल इसका अपवाद है। चमेली का तेल शिव को अर्पित की जाने वाली स्वीकार्य श्रृंगार सामग्री में आता है।
चमेली तेल चढ़ाने की विधि
- 1पहले शिवलिंग का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक पूर्ण करें।
- 2शिवलिंग को शुद्ध जल से धोएं और सुखने दें।
- 3चंदन का तिलक लगाने के बाद शिवलिंग पर चमेली का शुद्ध तेल या इत्र की कुछ बूंदें अर्पित करें।
- 4तेल को शिवलिंग पर हल्के से लगाएं — अधिक मात्रा में न डालें।
- 5'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें।
- 6इसके बाद बेलपत्र, फूल आदि अर्पित करें।
लाभ
- ▸भूमि-वाहन सुख प्राप्ति (धार्मिक मान्यता)।
- ▸जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुगंध (प्रसन्नता)।
- ▸वैवाहिक जीवन में मधुरता।
- ▸शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं — चमेली की सुगंध उन्हें प्रिय है।
अन्य सुगंधित तेल
चमेली के अतिरिक्त चंदन का तेल, केवड़ा (आरती के बाद, शिवलिंग पर सीधे नहीं), और गुलाब जल भी शिव को अर्पित किया जा सकता है।
ध्यान रखें
- ▸शुद्ध, प्राकृतिक चमेली का तेल/इत्र ही प्रयोग करें — सिंथेटिक परफ्यूम न लगाएं।
- ▸अत्यधिक मात्रा में तेल न डालें।





