विस्तृत उत्तर
पंचामृत से देव अभिषेक करने के बाद कुछ निर्धारित नियमों का पालन करना शास्त्रसम्मत है।
अभिषेक के बाद मूर्ति को पहले गंगाजल या शुद्ध जल से धोएं ताकि चिपचिपापन दूर हो और मूर्ति स्वच्छ हो जाए। फिर स्वच्छ वस्त्र से मूर्ति को साफ करें। इसके बाद नए वस्त्र (यदि हों) पहनाएं और पुनः षोडशोपचार पूजन आरंभ करें — चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
अभिषेक में प्रयुक्त पंचामृत को 'चरणामृत' के रूप में माना जाता है — इसे पूरी श्रद्धा के साथ, दोनों हाथों में ऊपर दाहिना हाथ रखकर, शीश से लगाकर ग्रहण करें। बाहर बैठे भक्तों में भी यह वितरित करें। इस पंचामृत को कभी नाली में नहीं बहाना चाहिए — यह अत्यंत अपमान माना जाता है। यदि अत्यधिक मात्रा हो तो तुलसी के पास भूमि में अर्पित कर दें। पंचामृत को ताँबे के पात्र से अर्पित करना उत्तम माना गया है और यह पात्र पूजन के बाद स्वच्छ कर रखना चाहिए।





