विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में तुलसी को देवी स्वरूप माना गया है और उनके पत्ते तोड़ने के लिए कुछ निश्चित नियम बताए गए हैं। सबसे पहले जानें कि तुलसी के पत्ते हमेशा सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही तोड़ने चाहिए। यह सबसे मूल नियम है — रात या संध्याकाल में पत्ते तोड़ना शास्त्रसम्मत नहीं है क्योंकि सांध्यकाल में तुलसी माता विश्राम करती हैं।
पत्ते तोड़ने से पहले स्नान करना अनिवार्य माना गया है। बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में तोड़े गए पत्ते भगवान की पूजा में मान्य नहीं होते। पत्ते तोड़ते समय नाखूनों का उपयोग नहीं करना चाहिए — हमेशा उंगलियों के पोर से ही तोड़ें। विष्णु पुराण के अनुसार रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति, सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के दिन तुलसी पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इन दिनों तोड़े गए पत्तों से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता।
जब घर में किसी की मृत्यु हो, तब तेरहवीं तक पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। नवजात शिशु के नामकरण तक भी यही नियम है। तुलसी के पत्ते तोड़ने से पहले हाथ जोड़कर प्रार्थना करना चाहिए। एक बार में एक-एक पत्ती तोड़ें, बिना कारण अनावश्यक पत्तों को नष्ट न करें। विशेष बात यह है कि तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता — उन पर जल छिड़ककर पुनः भगवान को अर्पित किया जा सकता है।





