विस्तृत उत्तर
यद्यपि कर्मफल का विधान कठोर और अनिवार्य प्रतीत होता है, तथापि शास्त्र इससे बचने के उपाय भी बताते हैं। गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके सिरहाने तुलसी का पौधा हो या मुख में तुलसी का पत्ता रखा हो तो उसे यमदण्ड का सामना नहीं करना पड़ता। इसी प्रकार यदि मरते समय मुख में गंगाजल हो तो शरीर और आत्मा दोनों पवित्र हो जाते हैं। यदि व्यक्ति श्रीमद्भागवत या किसी पवित्र ग्रंथ का पाठ सुनते हुए प्राण त्यागे तो भी वह यमदण्ड से बच जाता है।
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