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यमदण्ड से जुड़े सभी प्रश्न(10)

यमदण्ड पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 10 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

मार्कण्डेय की कथा से क्या संदेश मिलता है?

मार्कण्डेय की कथा सिखाती है कि मृत्यु का नियम परम सत्य है लेकिन सच्ची भक्ति और ईश्वर की कृपा उस नियम से भी परे है। भौतिक नियम आध्यात्मिक शक्तियों के अधीन हैं।

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दिव्यास्त्र

मार्कण्डेय को यमदण्ड से कैसे बचाया गया?

यमराज का पाश शिवलिंग पर पड़ने से क्रुद्ध होकर शिव महाकाल रूप में प्रकट हुए, यमराज को प्रहार से मूर्छित किया और मार्कण्डेय को अमरता का वरदान दिया।

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दिव्यास्त्र

यमदण्ड के कितने अलग-अलग स्वरूप हैं?

यमदण्ड के चार स्वरूप हैं — यमराज का निजी शस्त्र कालदण्ड, महाभारत का दिव्यास्त्र, मृत्यु के बाद पापी को मिलने वाला दण्ड, और जैन कथाओं में एक पात्र का नाम।

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यमदण्ड को कालदण्ड क्यों कहते हैं?

यमदण्ड को कालदण्ड इसलिए कहते हैं क्योंकि यह 'समय का दण्ड' है — जब किसी का समय पूरा हो जाए तो मृत्यु के विधान से कोई नहीं बचा सकता।

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दिव्यास्त्र

यमदण्ड क्या है?

यमदण्ड के अनेक अर्थ हैं — यमराज का निजी अस्त्र, अर्जुन को मिला दिव्यास्त्र, मृत्यु के बाद पापी आत्मा का दण्ड, और जैन कथाओं में एक पात्र का नाम।

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दिव्यास्त्र

गंगाजल मृत्यु के समय क्यों दिया जाता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल होने से शरीर और आत्मा पवित्र हो जाते हैं और यमदण्ड नहीं भोगना पड़ता। इसीलिए हिंदू परंपरा में अंतिम समय में गंगाजल देने का विधान है।

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यमदण्ड से मुक्ति कैसे मिल सकती है?

यमदण्ड से मुक्ति के तीन उपाय हैं — मृत्यु के समय तुलसी पत्ता, गंगाजल, या श्रीमद्भागवत का पाठ सुनते हुए प्राण त्यागना।

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गरुड़ पुराण में यमदण्ड का क्या अर्थ है?

गरुड़ पुराण में यमदण्ड का अर्थ किसी शस्त्र से नहीं बल्कि मृत्यु के बाद पापी आत्मा को भोगनी पड़ने वाली दण्ड-प्रक्रिया से है। यह कर्मफल के अटल नियम का प्रतीक है।

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दिव्यास्त्र

दिव्यास्त्र यमदण्ड की शक्ति कितनी थी?

दिव्यास्त्र यमदण्ड अचूक और अत्यंत विनाशकारी था। इसकी शक्ति ब्रह्मास्त्र के समान मानी गई थी और यह यमराज के कालदण्ड की शक्ति का अंश था।

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दिव्यास्त्र

अर्जुन को यमदण्ड दिव्यास्त्र कैसे मिला?

वनवास काल में अर्जुन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज ने उनके पराक्रम और धर्मनिष्ठा को देखकर उन्हें यमदण्ड दिव्यास्त्र प्रदान किया।

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