विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार यदि व्यक्ति के मुख में गंगाजल हो तो उसका शरीर और आत्मा दोनों पवित्र हो जाते हैं और उसे यमदण्ड नहीं भोगना पड़ता। गंगाजल की यह पवित्रता उसे यमदूतों और यमदण्ड से मुक्त रखती है। यही कारण है कि हिंदू परंपरा में अंतिम समय में व्यक्ति को तुलसी और गंगाजल देने का विधान है। यह परंपरा इस विश्वास पर आधारित है कि पवित्र वस्तुओं की उपस्थिति आत्मा को कर्मफल के कठोर दण्ड से बचाती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





