विस्तृत उत्तर
जब यमराज ने अपना पाश मार्कण्डेय पर डाला, तो वह पाश शिवलिंग पर भी जा पड़ा। अपने भक्त और अपने प्रतीक का यह अपमान देखकर भगवान शिव क्रोधित हो उठे और शिवलिंग से महाकाल के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने यमराज की छाती पर एक शक्तिशाली प्रहार किया जिससे यमराज मूर्छित होकर गिर पड़े। भगवान शिव ने न केवल मार्कण्डेय के प्राणों की रक्षा की, बल्कि उन्हें अमरता का वरदान भी दिया। इस प्रकार भक्ति की शक्ति ने यमदण्ड के विधान को पराजित किया।
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