विस्तृत उत्तर
यमदण्ड के चार प्रमुख स्वरूप हैं। पहला, हिन्दू पौराणिक शस्त्र के रूप में — यमराज का निजी 'दण्ड' या 'गदा' जिसे कालदण्ड भी कहते हैं। इसका स्रोत शिव पुराण और देवी भागवत पुराण हैं और यह कर्मफल के अंतिम और अकाट्य विधान का प्रतीक है। दूसरा, महाभारत का दिव्यास्त्र — मंत्रों से चलने वाला एक अस्त्र जो अर्जुन को यमराज से मिला था। तीसरा, कर्म-दण्ड की अवधारणा — मृत्यु के बाद पापी आत्मा द्वारा भोगे जाने वाले कष्ट, जिसका वर्णन गरुड़ पुराण में मिलता है। चौथा, जैन कथाओं में एक पात्र के नाम के रूप में।
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