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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में 'यमदण्ड' शब्द का प्रयोग किसी शस्त्र के लिए नहीं, बल्कि उस दण्ड-प्रक्रिया के लिए किया गया है जो पापी आत्मा को मृत्यु के पश्चात भोगनी पड़ती है। यह कर्मफल के सिद्धांत का एक भयावह किंतु आवश्यक पहलू है। इस संदर्भ में यमदण्ड कर्म के उस अटल नियम का प्रतीक है जहाँ हर क्रिया की प्रतिक्रिया निश्चित है और किसी भी बुरे कर्म का फल भोगे बिना उससे मुक्ति संभव नहीं है।
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