विस्तृत उत्तर
पूजा के दौरान आरती में जलाई गई कपूर की लौ या दीपक बुझाने के बाद जो जल या तरल बचता है, उसका सही तरीके से विसर्जन करना शास्त्रसम्मत है।
आरती में प्रयुक्त जल, चरणामृत और अन्य पूजा का जल — इन्हें कभी नाली, शौचालय या अपवित्र स्थान पर नहीं बहाना चाहिए। यह भगवान का चरणोदक है और अत्यंत पवित्र माना जाता है। सबसे उत्तम है कि इसे तुलसी के पौधे में अर्पित करें — तुलसी को पवित्र जल प्रिय है। इसके अलावा किसी पवित्र पेड़ — पीपल, बड़ या नीम — की जड़ में यह जल डाला जा सकता है।
यदि नजदीक कोई नदी या बहता जल हो, तो वहाँ विसर्जित करें। घर के आंगन की मिट्टी में या किसी शुद्ध भूमि में भी डाला जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा का यह जल पैरों से नहीं रौंदा जाना चाहिए — इसे ऐसी जगह डालें जहाँ लोगों का पैर न पड़े। चरणामृत और पंचामृत तो प्रसाद रूप में ग्रहण कर लेना ही सर्वोत्तम है।





