विस्तृत उत्तर
श्रद्धा और भाव प्रधान — माध्यम गौण।
पक्ष: यूट्यूब पर आरती देखना/सुनना = दर्शन+श्रवण भक्ति। यदि सच्चे भाव से देख रहे हैं, हाथ जोड़े हैं, मन ईश्वर में है — तो लाभ अवश्य। विशेषतः बीमार, बुजुर्ग, विदेश में जो मंदिर नहीं जा सकते।
विपक्ष: स्क्रीन = विकर्षण। विज्ञापन = भक्ति भंग। मंदिर जाकर आरती = पूर्ण अनुभव (दीपक, सुगंध, वातावरण)। ऑनलाइन = आंशिक।
संतुलित: मंदिर जा सकें = जाएँ। न जा सकें = ऑनलाइन सुनना बिल्कुल सही — कुछ न करने से बेहतर। पर आदत न बनाएँ — जब संभव हो मंदिर अवश्य जाएँ।
गीता (9.26): *'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति'* — भगवान भाव देखते हैं, माध्यम नहीं।





