विस्तृत उत्तर
मत भिन्नता — पर सीधा उत्तर: तीर्थ जैसा पुण्य = नहीं।
ऑनलाइन पूजा लाभ: संकल्प शक्ति (आपकी नीयत = पुण्य), जो तीर्थ नहीं जा सकते (बीमार/वृद्ध/विदेशी) उनके लिए = विकल्प। पंडित द्वारा विधिवत पूजा = कुछ पुण्य।
पर तीर्थ ≠ ऑनलाइन: तीर्थ स्नान, दर्शन, ऊर्जा क्षेत्र, प्रकृति, सामूहिक भक्ति, कठिनाई सहन (तपस्या) = ऑनलाइन में संभव नहीं। तीर्थ = शरीर+मन+आत्मा। ऑनलाइन = केवल संकल्प।
संतुलित: जा सकते हैं = अवश्य जाएँ — ऑनलाइन विकल्प नहीं। नहीं जा सकते = ऑनलाइन = कुछ नहीं करने से बेहतर। पर 'ऑनलाइन पूजा = तीर्थ यात्रा' — यह भ्रम।
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