विस्तृत उत्तर
आधुनिक प्रश्न — संतुलित उत्तर:
पुण्य मिल सकता: भाव प्रधान — गीता 9.26 'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति'; भक्ति = सर्वोपरि, माध्यम गौण। वृद्ध/बीमार/दिव्यांग = शारीरिक यात्रा असंभव; वर्चुअल = एकमात्र विकल्प। मानसिक तीर्थ यात्रा = शास्त्रों में मान्य ('मानसिक पूजा')।
सीमाएं: भौतिक उपस्थिति = तीर्थ ऊर्जा/वातावरण/स्नान/प्रसाद/साधु संग = अतुलनीय। तीर्थ कष्ट (यात्रा कठिनाई) = तपस्या का अंग; वर्चुअल में यह नहीं। स्क्रीन ≠ साक्षात् दर्शन।
सार: वर्चुअल = विकल्प (असमर्थ हों तो); प्रतिस्थापन नहीं। संभव हो तो शारीरिक यात्रा = सर्वोत्तम। दोनों में भाव = कुंजी।





