मंत्र विधिमंत्र जप ऑनलाइन सुनकर करने से भी फल मिलता है क्या?
श्रवण = भक्ति का प्रथम प्रकार — सुनना लाभदायी। परंतु: स्वयं जप > सुनना (कंपन, चक्र, चारों इन्द्रियां)। ऑनलाइन सीमा: विक्षेप, अशुद्ध उच्चारण। सुझाव: सुनते समय मन में जपें। प्रामाणिक स्रोत। स्वयं जप = कोई विकल्प नहीं।
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