विस्तृत उत्तर
मत भिन्नता — सीधा उत्तर: आदर्श नहीं, पर विकल्प।
पारंपरिक: दीक्षा = गुरु-शिष्य सम्बंध = व्यक्तिगत, ऊर्जा स्थानांतरण, स्पर्श (शक्तिपात), आँखों में आँखें = ऑनलाइन असंभव। असली दीक्षा = सशरीर।
आधुनिक वास्तविकता: विदेश/दूरदराज = गुरु मिलना कठिन। ऑनलाइन = मार्गदर्शन/शिक्षा/मंत्र = संभव। कई प्रामाणिक गुरु ऑनलाइन शिक्षा देते।
सावधानी: ऑनलाइन = नकली बाबा/ठगी का खतरा सबसे अधिक। पैसा माँगने वाले, चमत्कार दिखाने वाले, 'केवल मेरे पास मोक्ष' = दूर रहें।
संतुलित: ऑनलाइन शिक्षा/मार्गदर्शन = स्वीकार्य। ऑनलाइन औपचारिक दीक्षा = आदर्श नहीं — जब भी संभव हो सशरीर मिलें।
सार: गुरु खोजें = धीरज रखें। जल्दबाजी में ऑनलाइन दीक्षा = जोखिम।




