विस्तृत उत्तर
तंत्र में गुरु की अनिवार्यता कुलार्णव तंत्र में बहुत स्पष्ट रूप से है:
कुलार्णव तंत्र (अध्याय 13)
गुरोर्वचनमादाय साधनं यः प्रकुर्वते।
सफलं तस्य तत् सर्वं गुरोर्वाक्यं प्रमाणतः।।'
— गुरु के वचन लेकर जो साधना करे — उसकी साधना सफल होती है।
गुरु क्यों अनिवार्य
1शक्तिपात
तंत्र में शक्ति को जगाना होता है। गुरु 'शक्तिपात' द्वारा अपनी साधना-शक्ति शिष्य को हस्तांतरित करते हैं। बिना इसके साधना निष्फल या हानिकारक।
2मंत्र का जीवन
अदीक्षितस्य वामोरु न मंत्रः सिद्धिदायकः।' — बिना दीक्षा के मंत्र सिद्धि नहीं देता।
3मार्गदर्शन
तंत्र साधना में विविध अनुभव, भय, दर्शन होते हैं — बिना गुरु के साधक पथभ्रष्ट हो सकता है।
4रक्षा
गुरु साधक को नकारात्मक शक्तियों और साधना के दुष्प्रभावों से बचाते हैं।
5परंपरा का प्रवाह
तंत्र में पुस्तक से ज्ञान अपूर्ण है — गुरु-शिष्य परंपरा में पीढ़ियों का अनुभव प्रवाहित होता है।
कुलार्णव तंत्र
तंत्रे विना गुरुं बद्धो न मुच्यते।' — गुरु के बिना तंत्र में साधक मुक्त नहीं होता।





