विस्तृत उत्तर
बिना गुरु के जप के विषय में शास्त्रों में दोनों मत मिलते हैं:
गुरु दीक्षा का महत्व (कुलार्णव तंत्र)
अदीक्षितस्य वामोरु न मंत्रः सिद्धिदायकः।' — बिना दीक्षा के मंत्र सिद्धि नहीं देता।
कुलार्णव तंत्र में कहा गया है — गुरु मंत्र में अपनी साधना की शक्ति भर देते हैं। दीक्षित मंत्र अधिक प्रभावशाली है।
बिना गुरु के मंत्र — भागवत पुराण का मत
भागवत पुराण में भगवान के नाम जप के लिए किसी दीक्षा की आवश्यकता नहीं बताई गई है:
हरे राम हरे कृष्ण नाम संकीर्तन' — बिना गुरु के भी मोक्षदायक।
नारद भक्ति सूत्र
नारद स्तु तद्अर्पितखिलाचारिता' — जो सब कुछ भगवान को अर्पित कर दे — उसके लिए नाम जप पर्याप्त है।
व्यावहारिक मत
- 1नाम जप (राम, हरे कृष्ण, ॐ नमः शिवाय) — बिना गुरु के भी पूर्ण
- 2तंत्र के बीज मंत्र — गुरु दीक्षा से अधिक प्रभावशाली
- 3पुरश्चरण — गुरु मार्गदर्शन उचित
सरल सत्य
भगवान का नाम लेने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं। जो श्रद्धा से जपे — भगवान उसे सुनते हैं।





