विस्तृत उत्तर
शक्तिपात = गुरु से शिष्य को शक्ति/ऊर्जा transfer:
अनुभव (विविध)
- 1शारीरिक: कंपन, गर्मी/ठंडक, विद्युत-सा प्रवाह (रीढ़), अनैच्छिक गति।
- 2भावनात्मक: तीव्र रोना/हंसना, आनंद, प्रेम, भय (क्षणिक)।
- 3दृश्य: प्रकाश, रंग, देवता दर्शन (बंद आंखें)।
- 4ध्वनि: नाद (ॐ, घंटी, बांसुरी — आंतरिक)।
- 5शून्यता: 'मैं' विस्मृत — क्षणिक समाधि।
- 6कुंडलिनी: तत्काल कुंडलिनी जागरण (दुर्लभ)।
कैसे: गुरु = स्पर्श (शिर/आज्ञा), दृष्टि, मंत्र, संकल्प — से ऊर्जा transfer।
काश्मीर शैव: शक्तिपात = ईश्वर कृपा → गुरु माध्यम। 3 प्रकार: तीव्र (तत्काल मोक्ष), मध्यम, मंद।
needs_review: अनुभव व्यक्तिगत — सबका भिन्न। नकली 'गुरु' सावधानी।


