विस्तृत उत्तर
माता त्रिपुर सुंदरी (जिन्हें ललिता या राजराजेश्वरी भी कहा जाता है) श्री विद्या की प्रमुख देवी हैं। वे तीनों लोकों (त्रिपुर) में सबसे सुंदर और ऐश्वर्यशालिनी हैं। इनकी साधना से साधक को 'भोग' (सांसारिक सुख) और 'मोक्ष' (आध्यात्मिक मुक्ति) दोनों एक साथ प्राप्त होते हैं।
इनका मुख्य मंत्र पंचदशी (15 अक्षरों वाला) या षोडशी (16 अक्षरों वाला) होता है, जो अत्यंत गुप्त है और इसे केवल गुरु के मुख से ही सुना जाना चाहिए ('क ए ई ल ह्रीं... आदि)। साधना विधि के अनुसार, साधक को लाल वस्त्र, लाल आसन और रुद्राक्ष या स्फटिक की माला का उपयोग करना चाहिए। श्री यंत्र की स्थापना करके उस पर कुमकुम (लाल चंदन) से अर्चना की जाती है। यह साधना अत्यंत सौम्य और सात्विक है, जो साधक के चेहरे पर अद्भुत तेज और आकर्षण उत्पन्न करती है।

