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तंत्र साधना📜 तंत्र शास्त्र — मंत्र-यंत्र-तंत्र त्रिपुटी1 मिनट पठन

तंत्र में मंत्र जप और यंत्र पूजा एक साथ कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

यंत्र सामने + दीपक → भूत शुद्धि/न्यास → यंत्र त्राटक/ध्यान → माला जप (यंत्र देखते/कल्पना) → ऊर्जा यंत्र में संचित। तंत्र=विधि, मंत्र=ऊर्जा, यंत्र=केंद्र (TantrikRahasya)।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र + यंत्र = सम्पूर्ण साधना — एक साथ:

विधि

  1. 1यंत्र सामने (ऊंचे स्थान, पूर्व/उत्तर)।
  2. 2दीपक + धूप + पुष्प (यंत्र पर)।
  3. 3भूत शुद्धि → विनियोग → करन्यास → अंगन्यास (तैयारी)।
  4. 4ध्यान: यंत्र पर दृष्टि (त्राटक) — बिंदु/केंद्र पर focus।
  5. 5मंत्र जप: माला से 108/1008 — यंत्र देखते हुए या बंद आंखों से यंत्र कल्पना करते हुए।
  6. 6जप ऊर्जा = यंत्र में संचित।
  7. 7पूर्णाहुति/क्षमा।

उदाहरण: श्री यंत्र + 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं' 108 = लक्ष्मी साधना। दुर्गा यंत्र + नवार्ण = दुर्गा साधना।

TantrikRahasya (पूर्व शोध): 'तंत्र = विधि, मंत्र = ऊर्जा, यंत्र = केंद्र।'

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र — मंत्र-यंत्र-तंत्र त्रिपुटी
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