विस्तृत उत्तर
माता महाकाली का यह मंत्र तंत्र शास्त्र का अत्यंत जाग्रत और उग्र मंत्र है। इसमें प्रयुक्त 'क्रीं' (Kreem) देवी का आदि बीज है। 'क' का अर्थ है महाकाली, 'र' का अर्थ है ब्रह्म, और 'ई' का अर्थ है महामाया। यह मंत्र अज्ञान, भ्रम और सांसारिक बंधनों को निर्दयता से काटने वाला अस्त्र है।
इस मंत्र का मुख्य उद्देश्य केवल बाहरी शत्रुओं का नाश करना नहीं है, बल्कि साधक के भीतर बैठे सबसे बड़े शत्रुओं (अहंकार, भय, मोह और काम) को भस्म करना है। इसका जप हमेशा लाल या काले आसन पर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके और रुद्राक्ष की माला से किया जाता है। यदि कोई साधक पूर्ण समर्पण के साथ इस मंत्र का जप करता है, तो माता काली तत्काल उसकी रक्षा के लिए एक ऊर्जा-कवच का निर्माण करती हैं और उसे मृत्यु के भय से मुक्त कर देती हैं।