विस्तृत उत्तर
श्री विद्या सनातन तंत्र की सबसे उच्च, सात्विक और रहस्यमयी साधना है। यह माता त्रिपुर सुंदरी (ललिता महात्रिपुरसुंदरी) की उपासना है। इस साधना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साधक को 'भोग' (समस्त भौतिक ऐश्वर्य) और 'मोक्ष' (परम ज्ञान) दोनों एक साथ प्रदान करती है।
श्री विद्या का मूल मंत्र 'पञ्चदशी' (15 अक्षरों वाला) मंत्र है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत गुप्त रखा गया है। इसके तीन खंड (कूट) होते हैं—वाग्भव कूट, कामराज कूट और शक्ति कूट। यह मंत्र 'क ए ई ल ह्रीं, ह स क ह ल ह्रीं, स क ल ह्रीं' है। इसमें प्रयुक्त बीजाक्षर संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना, ज्ञान और इच्छा शक्ति का साक्षात स्वरूप हैं। इस मंत्र का जप बिना गुरु दीक्षा के पूर्णतः वर्जित है। योग्य गुरु से दीक्षा लेकर श्रीयंत्र के सम्मुख इसका जप करने से व्यक्ति स्वयं शिव स्वरूप हो जाता है।

