विस्तृत उत्तर
दस महाविद्याओं में आठवीं विद्या माता बगलामुखी (पीताम्बरा देवी) हैं। इनकी साधना मुख्यतः शत्रुओं के स्तंभन, मुकदमों में जीत और घोर विपत्ति को टालने के लिए की जाती है। यह एक अत्यंत उग्र तांत्रिक साधना है, जिसके नियम बहुत कठोर हैं।
साधना के दौरान सब कुछ 'पीला' होना चाहिए—साधक को पीले वस्त्र पहनने चाहिए, पीले आसन पर बैठना चाहिए, माता को पीले पुष्प और हल्दी का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। जप के लिए केवल 'हल्दी की माला' (हरिद्रा माला) का प्रयोग ही शास्त्र सम्मत है। यह साधना केवल रात के समय (निशीथ काल) की जाती है। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि साधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन और मांस-मदिरा का पूर्ण त्याग अनिवार्य है। बिना गुरु दीक्षा के बगलामुखी का 36 अक्षरी मंत्र नहीं जपना चाहिए।
