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तंत्र साधना📜 तंत्र शास्त्र, षट्कर्म1 मिनट पठन

तंत्र में शांति कर्म सबसे सात्विक क्यों माना जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

षट्कर्म: शांति(सात्विक)→वशीकरण→स्तंभन(राजसिक)→विद्वेषण→उच्चाटन→मारण(तामसिक)। शांति = कल्याण, निःस्वार्थ, पुण्य। सामान्य = केवल शांति। शेष = तांत्रिक/गुरु।

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विस्तृत उत्तर

षट्कर्म में शांति = सर्वसात्विक:

षट्कर्म (6 तांत्रिक कर्म)

  1. 1शांति = रोग/दोष/ग्रह शांति → सात्विक (कल्याण)।
  2. 2वशीकरण = आकर्षण → राजसिक।
  3. 3स्तंभन = रोकना → राजसिक।
  4. 4विद्वेषण = विभेद → तामसिक।
  5. 5उच्चाटन = हटाना → तामसिक।
  6. 6मारण = नाश → तामसिक (सर्वनिकृष्ट)।

शांति क्यों सात्विक

  • कल्याण उद्देश्य: किसी को हानि नहीं — रोगी का रोग शांत, ग्रह शांत = सबका भला।
  • निःस्वार्थ: दूसरों का कल्याण = निष्काम।
  • कर्म फल: शांति = पुण्य। मारण/विद्वेषण = पाप।

सामान्य भक्त: केवल शांति कर्म = उचित। शेष 5 = तांत्रिक/गुरु दीक्षित।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, षट्कर्म
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