ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

षट्कर्म — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 9 प्रश्न

🔍
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में आकर्षण कर्म कैसे किया जाता है?

'आकर्षित करना' — राजसिक। सात्विक: व्यक्तित्व, अवसर, ईश्वर आकर्षण ('क्लीं')। अनुचित: बलपूर्वक = पाप। 'ॐ क्लीं कृष्णाय नमः' = सात्विक। विधि विवरण अनुचित।

आकर्षणकर्मकैसे
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में विद्वेषण कर्म का क्या उद्देश्य होता है?

'भेद/विभाजन' — दो में शत्रुता। तामसिक (निकृष्ट)। गंभीर कर्म बंधन। सात्विक: स्वयं का बुराई से अलग = वैराग्य। सामान्य: पूर्णतः वर्जित। केवल शांति = उचित।

विद्वेषणकर्मउद्देश्य
तंत्र साधना

तंत्र में शांति कर्म सबसे सात्विक क्यों माना जाता है?

षट्कर्म: शांति(सात्विक)→वशीकरण→स्तंभन(राजसिक)→विद्वेषण→उच्चाटन→मारण(तामसिक)। शांति = कल्याण, निःस्वार्थ, पुण्य। सामान्य = केवल शांति। शेष = तांत्रिक/गुरु।

शांति कर्मसात्विकषट्कर्म
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में मारण कर्म क्या है और इसका दुष्प्रभाव क्या होता है?

सर्वनिकृष्ट + सर्ववर्जित। दुष्प्रभाव: गंभीर कर्म बंधन, प्रतिघात (परिवार कष्ट), पागलपन, साधना पतन, IPC 302/307 (कानूनी अपराध)। 'जो मारे = वो मरे।' शांति = एकमात्र धर्म। विधि कभी न दें।

मारणकर्मक्या
तंत्र ज्ञान

वशीकरण मंत्र क्या है?

वशीकरण तंत्र के षट्कर्म में आता है — किंतु कुलार्णव तंत्र स्पष्ट कहता है: 'दूसरे की इच्छा के विरुद्ध वश करना पाप है।' शास्त्र का मत है कि षट्कर्म में केवल 'शांति' (रोग-बाधा निवारण) सात्विक और उचित है। सच्ची साधना आत्मोद्धार के लिए है, दूसरों के शोषण के लिए नहीं।

वशीकरणषट्कर्मशास्त्र मत
तंत्र ज्ञान

वशीकरण मंत्र क्या है?

वशीकरण तंत्र के षट्कर्मों में से एक है — किंतु कुलार्णव तंत्र की स्पष्ट चेतावनी है कि दूसरों को वश में करने की चेष्टा साधक को स्वयं हानि पहुँचाती है। श्रेष्ठ वशीकरण है — आत्म-वशीकरण: अपने मन और इंद्रियों को वश में करना। किसी की स्वतंत्र इच्छा का हरण पाप है।

वशीकरणषट्कर्मतंत्र कर्म
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में स्तंभन कर्म किस परिस्थिति में किया जाता है?

'रोकना' — शत्रु गति/वाक्/क्रिया। कोर्ट/विवाद, रोग प्रगति। राजसिक। बगलामुखी = स्तंभन देवी ('ह्लीं')। सामान्य: बगलामुखी जप मान्य। षट्कर्म = गुरु। संवेदनशील।

स्तंभनकर्मपरिस्थिति
तंत्र शास्त्र

तंत्र में षट्कर्म शांति वशीकरण स्तंभन विद्वेषण उच्चाटन मारण क्या हैं?

6 कर्म: शांति (सात्विक✅), वशीकरण (राजसिक), स्तंभन (राजसिक), विद्वेषण (तामसिक❌), उच्चाटन (तामसिक❌), मारण (महातामसिक❌❌)। शांति = एकमात्र शुभ। शेष = कर्म बंधन/पाप। मारण/विद्वेषण/उच्चाटन = महापाप।

षट्कर्मशांतिवशीकरण
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में उच्चाटन कर्म का प्रभाव कैसे काम करता है?

'उखाड़ना/हटाना' — स्थान/पद/मोह से। तामसिक (कर्म फल)। सात्विक: स्वयं की बुराई हटाना। सामान्य = केवल शांति कर्म। उच्चाटन = गुरु दीक्षित, कर्म बंधन, वर्जित। विधि गोपनीय।

उच्चाटनकर्मप्रभाव

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।