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तंत्र शास्त्र📜 वाराही तंत्र, तंत्रसार, शाक्त आगम2 मिनट पठन

तंत्र में षट्कर्म शांति वशीकरण स्तंभन विद्वेषण उच्चाटन मारण क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

6 कर्म: शांति (सात्विक✅), वशीकरण (राजसिक), स्तंभन (राजसिक), विद्वेषण (तामसिक❌), उच्चाटन (तामसिक❌), मारण (महातामसिक❌❌)। शांति = एकमात्र शुभ। शेष = कर्म बंधन/पाप। मारण/विद्वेषण/उच्चाटन = महापाप।

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विस्तृत उत्तर

षट्कर्म = तंत्र शास्त्र में वर्णित छह प्रकार के कर्म। वाराही तंत्र में आगम के लक्षणों में षट्कर्म साधन शामिल है।

छह कर्म

  1. 1शांति: शत्रु/रोग/ग्रह दोष शांत करना — सात्विक, शुभ।
  2. 2वशीकरण: किसी को वश में करना — राजसिक।
  3. 3स्तंभन: किसी को रोकना/स्थिर करना — राजसिक।
  4. 4विद्वेषण: दो व्यक्तियों में भेद करना — तामसिक।
  5. 5उच्चाटन: किसी को स्थान/कार्य से हटाना — तामसिक।
  6. 6मारण: किसी का नाश — अत्यंत तामसिक, महापाप।

शास्त्रीय दृष्टि

  • शांति कर्म = एकमात्र सात्विक — सभी कर सकते हैं।
  • शेष 5 = राजसिक/तामसिक — कर्म बंधन। विशेषकर विद्वेषण, उच्चाटन, मारण = महापाप।
  • तंत्र ग्रंथों में इनका उल्लेख = ज्ञानार्थ, प्रयोगार्थ नहीं। जैसे विषशास्त्र विष का वर्णन करता है = विष पीने के लिए नहीं।

गीता: 'कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः' — कर्म, अकर्म और विकर्म को जानना चाहिए।

ध्यान रखें: मारण, उच्चाटन, विद्वेषण = अत्यंत पापकर्म। इनका प्रयोग = कर्म बंधन + नरक। 'जैसा करोगे, वैसा भोगोगे।'

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शास्त्रीय स्रोत
वाराही तंत्र, तंत्रसार, शाक्त आगम
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