विस्तृत उत्तर
वशीकरण तंत्र शास्त्र के 'षट्कर्म' में से एक है। इसका शास्त्रीय परिचय और नैतिक दृष्टिकोण दोनों यहाँ दिए जा रहे हैं:
षट्कर्म — तंत्र के छः कर्म
महानिर्वाण तंत्र में तंत्र के छः कर्म वर्णित हैं:
- 1शांति — रोग, संकट, ग्रह पीड़ा शमन
- 2वशीकरण — किसी को आकर्षित/वश करना
- 3स्तंभन — किसी कार्य को रोकना
- 4विद्वेषण — दो व्यक्तियों में भेद उत्पन्न करना
- 5उच्चाटन — किसी को स्थान से हटाना
- 6मारण — किसी को हानि पहुँचाना
शांति कर्म एकमात्र ऐसा कर्म है जिसे सभी परंपराएं स्वीकार करती हैं। बाकी पाँच कर्म केवल दीक्षित तांत्रिकों के लिए हैं और इनके उपयोग पर कड़े नैतिक प्रतिबंध हैं।
वशीकरण का शास्त्रीय अर्थ
शारदा तिलक में वशीकरण के दो रूप बताए गए हैं:
- 1आत्म-वशीकरण: अपने मन और इंद्रियों को वश में करना — यह सर्वश्रेष्ठ और अनुमोदित वशीकरण है। 'आत्मानं वशमानय' — स्वयं को वश में करो।
- 1पर-वशीकरण: किसी अन्य व्यक्ति को वश में करने की चेष्टा।
पर-वशीकरण पर कुलार्णव तंत्र की स्पष्ट चेतावनी
यः परं वशमानेतुं तंत्रेण प्रयतेत सः। स्वयमेव विनश्येत् तद्दोषैः परिपीडितः।
— जो तंत्र से दूसरे को वश में करना चाहता है, वह स्वयं उन दोषों से नष्ट होता है।
इस्लामी दृष्टिकोण नहीं — हिंदू शास्त्र का मत
हिंदू धर्म में किसी की स्वतंत्र इच्छा का हरण पाप माना गया है। 'परस्त्री/पर-पुरुष वशीकरण' — यह धर्म-विरुद्ध है।
वशीकरण जो धर्मसम्मत है
- ▸माता-पिता, गुरु और ईश्वर की भक्ति से उनकी कृपा पाना
- ▸अपने सद्गुणों से दूसरों को आकर्षित करना
- ▸'ॐ नमो नारायणाय' — सभी को प्रसन्न करने वाला मंत्र (भक्ति भाव से)
पाठक के लिए स्पष्ट संदेश
Pauranik app के संदर्भ में — वशीकरण मंत्र और नकारात्मक तंत्र कर्म का विस्तृत विधान देना उचित नहीं है। सच्ची तंत्र परंपरा यह नहीं सिखाती। जो कोई किसी की इच्छा के विरुद्ध उसे वश में करना चाहता है, वह तंत्र का दुरुपयोग है।





