विस्तृत उत्तर
विद्वेषण = षट्कर्म चौथा — 'भेद/विभाजन':
उद्देश्य (तंत्र): दो व्यक्तियों/समूहों में मतभेद/शत्रुता उत्पन्न करना।
गुण: तामसिक — सबसे निकृष्ट षट्कर्मों में (मारण के बाद)।
क्यों अनुचित
- ▸दूसरों में भेद = पाप कर्म → गंभीर कर्म बंधन।
- ▸'बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से होय' — विद्वेषण करने वाले को भी विद्वेष मिलता है।
सात्विक अर्थ (यदि कोई): स्वयं का बुराई से 'विद्वेषण' = बुरी आदतों/संगत से अलग करना। माया से विद्वेष = वैराग्य।
सामान्य भक्त: पूर्णतः वर्जित। दूसरों का अहित = पाप। केवल शांति कर्म = उचित।
needs_review: तामसिक + अनैतिक — विधि = अनुचित।





