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तंत्र षट्कर्म📜 तंत्र शास्त्र, षट्कर्म1 मिनट पठन

तंत्र में विद्वेषण कर्म का क्या उद्देश्य होता है?

संक्षिप्त उत्तर

'भेद/विभाजन' — दो में शत्रुता। तामसिक (निकृष्ट)। गंभीर कर्म बंधन। सात्विक: स्वयं का बुराई से अलग = वैराग्य। सामान्य: पूर्णतः वर्जित। केवल शांति = उचित।

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विस्तृत उत्तर

विद्वेषण = षट्कर्म चौथा — 'भेद/विभाजन':

उद्देश्य (तंत्र): दो व्यक्तियों/समूहों में मतभेद/शत्रुता उत्पन्न करना।

गुण: तामसिक — सबसे निकृष्ट षट्कर्मों में (मारण के बाद)।

क्यों अनुचित

  • दूसरों में भेद = पाप कर्म → गंभीर कर्म बंधन।
  • 'बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से होय' — विद्वेषण करने वाले को भी विद्वेष मिलता है।

सात्विक अर्थ (यदि कोई): स्वयं का बुराई से 'विद्वेषण' = बुरी आदतों/संगत से अलग करना। माया से विद्वेष = वैराग्य।

सामान्य भक्त: पूर्णतः वर्जित। दूसरों का अहित = पाप। केवल शांति कर्म = उचित।

needs_review: तामसिक + अनैतिक — विधि = अनुचित।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, षट्कर्म
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