विस्तृत उत्तर
सनातन तंत्र शास्त्र में माता पार्वती (सती) के 10 भयंकर और रहस्यमयी स्वरूपों को 'दस महाविद्या' कहा जाता है। प्रत्येक महाविद्या का अपना एक विशिष्ट बीज (Sonic energy) होता है जो उस देवी की संपूर्ण शक्तियों का केंद्र है।
ये बीज मंत्र इस प्रकार हैं:
- 1काली - 'क्रीं' (शत्रु नाश)
- 2तारा - 'स्त्रीं' या 'ह्रीं' (वाक् सिद्धि)
- 3त्रिपुर सुंदरी - 'ह्रीं' (भोग और मोक्ष)
- 4भुवनेश्वरी - 'ह्रीं' (ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य)
- 5छिन्नमस्ता - 'हूँ' (अहंकार नाश)
- 6त्रिपुर भैरवी - 'ह्स्रौं' (संकट निवारण)
- 7धूमावती - 'धूं' (तंत्र-मंत्र काट)
- 8बगलामुखी - 'ह्लीं' (स्तंभन और मुक़दमा)
- 9मातंगी - 'ऐं' (संगीत और कला)
- 10कमला - 'श्रीं' (स्थिर धन)
इन बीजाक्षरों को ही मूल आधार मानकर इन देवियों के महामंत्रों की रचना की गई है।