विस्तृत उत्तर
पारा (पारद/Mercury) भारतीय तंत्र और रस शास्त्र में अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली धातु माना गया है। इसे 'रस' (शिव का वीर्य) कहा जाता है।
शास्त्रीय महत्व
- 1पारद शिवलिंग: शुद्ध पारद से बना शिवलिंग सर्वश्रेष्ठ माना गया है। रसार्णव ग्रंथ में कहा गया — 'पारद शिवलिंग की पूजा से करोड़ शिवलिंगों की पूजा का फल मिलता है।' पारद = शिव का रस (तत्व), अभ्रक = पार्वती — दोनों का मिलन = शिव-शक्ति एकता।
- 1रस शास्त्र (आयुर्वेद): पारद का शोधन (purification) करके रसायन (औषधि) बनाई जाती है। अष्टसंस्कार (8 शुद्धि प्रक्रिया) से शुद्ध पारद = रोग नाश, दीर्घायु। यह आयुर्वेदिक रस शास्त्र का विषय है।
- 1पारद गोली/गुटिका: शुद्ध पारद की गोली (गुटिका) को तांत्रिक-आयुर्वेदिक ग्रंथों में विशेष शक्तिशाली माना गया है। इसे ध्यान, पूजा या औषधि प्रयोजन में रखा जाता है।
चेतावनी और सत्य
- ▸पारा अत्यंत विषैला (toxic) है। अशुद्ध पारद का सेवन या त्वचा सम्पर्क = पारद विषाक्तता (mercury poisoning) = गुर्दे, मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र को गम्भीर हानि।
- ▸बाजार में मिलने वाली अधिकांश 'पारद गोली' अशुद्ध या नकली होती हैं।
- ▸रस शास्त्र का शोधन = अत्यंत जटिल प्रक्रिया — केवल प्रशिक्षित वैद्य/आचार्य ही कर सकते हैं।
- ▸स्वयं पारद का प्रयोग कदापि न करें। पारद शिवलिंग प्रामाणिक स्रोत से ही खरीदें।
पूजा में उपयोग: पारद शिवलिंग = गृह पूजा में रखने योग्य (स्पर्श सुरक्षित यदि ठोस/शुद्ध हो)। जल अभिषेक, बेलपत्र, दूध से पूजा। पारद शिवलिंग को जलाधारी की आवश्यकता नहीं।

