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तंत्र साधना📜 तंत्रसार, लोक तंत्र, ज्योतिष ग्रंथ2 मिनट पठन

तंत्र में सरसों के तेल का तांत्रिक प्रयोग कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

सरसों तेल: शनि शांति दीपक (शनिवार, पीपल/शनि मंदिर), नजर उतारना (तेल+राई+नमक+मिर्च → अग्नि), शरीर लेपन (रक्षा), हनुमान पूजा, नकारात्मकता निवारण। सात्त्विक: शनिवार दीपक + हनुमान तेल। उन्नत = गुरु आवश्यक।

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विस्तृत उत्तर

सरसों का तेल तांत्रिक और लोक परम्परा दोनों में अत्यंत महत्वपूर्ण है:

शास्त्रीय प्रयोग

  1. 1शनि शांति दीपक: सरसों तेल शनि ग्रह से सम्बद्ध है। शनिवार को पीपल के नीचे या शनि मंदिर में सरसों तेल का दीपक जलाना = शनि दोष शांति का सर्वाधिक प्रचलित उपाय।
  1. 1नजर/दृष्टि दोष निवारण: सरसों तेल + राई (सरसों के बीज) + नमक + लाल मिर्च — इन्हें सिर से उतारकर अग्नि में डालना = नजर उतारने की लोक-तांत्रिक विधि। सरसों = उग्र ऊर्जा — नकारात्मकता को तोड़ती है।
  1. 1रक्षा कवच: सरसों तेल का शरीर पर लेपन (विशेषतः तलवों, माथे पर) = बाह्य नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा (लोक मान्यता)।
  1. 1हनुमान पूजा: हनुमान जी को सरसों/चमेली तेल अर्पित किया जाता है। हनुमान = शनि रक्षक — सरसों तेल = दोनों की प्रसन्नता।
  1. 1भूत-प्रेत निवारण (लोक मान्यता): सरसों तेल का दीपक = नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाता है। अमावस्या/शनिवार को घर के बाहर सरसों तेल दीपक जलाना।

सात्त्विक उपयोग (सभी के लिए): शनिवार शनि मंदिर/पीपल पर दीपक। हनुमान जी को तेल अर्पित। ये सरल, सुरक्षित प्रयोग हैं।

ध्यान दें: उन्नत तांत्रिक प्रयोगों के लिए गुरु मार्गदर्शन आवश्यक। लोक-तंत्र (नजर उतारना आदि) सामान्य परम्परा है, कठोर तांत्रिक साधना नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रसार, लोक तंत्र, ज्योतिष ग्रंथ
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