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तंत्र साधना📜 हठ योग, तंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

तंत्र में वीरभद्रासन और शवासन का क्या उपयोग है?

संक्षिप्त उत्तर

शवासन: मृतक भाव (शरीर अहंकार त्याग), भूत शुद्धि, योग निद्रा, ऊर्जा एकीकरण। वीरभद्रासन: शिव रौद्र, शक्ति जागरण, भय नाश, 'वीर' श्रेणी (कुलार्णव)। सिद्धासन: कुंडलिनी।

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विस्तृत उत्तर

तांत्रिक साधना में विशेष आसन:

शवासन (Corpse Pose)

  • पीठ के बल लेटना = मृतक समान।
  • तांत्रिक उपयोग: शव साधना, भूत शुद्धि — 'मैं मृत, अब पुनर्जन्म (शुद्ध)।' शरीर अहंकार त्याग।
  • योग निद्रा = शवासन + ध्यान।
  • साधना बाद = शवासन → ऊर्जा एकीकरण।

वीरभद्रासन (Warrior Pose)

  • वीरभद्र = शिव का रौद्र रूप (दक्ष यज्ञ)।
  • तांत्रिक: शक्ति जागरण, भय नाश, मूलाधार+मणिपुर सक्रिय।
  • वीर भाव = तांत्रिक साधक 'वीर' श्रेणी (कुलार्णव: पाशु→वीर→दिव्य)।

अन्य तांत्रिक: सिद्धासन (कुंडलिनी), पद्मासन (ध्यान), भद्रासन (बंध)।

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शास्त्रीय स्रोत
हठ योग, तंत्र शास्त्र
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