विस्तृत उत्तर
दिगम्बर साधना तंत्र की एक विशिष्ट और उन्नत साधना पद्धति है।
'दिगम्बर' का अर्थ
दिक्' (दिशा) + 'अम्बर' (वस्त्र) = जिसका वस्त्र दिशाएँ हों = निर्वस्त्र। दिगम्बर साधना = बिना वस्त्रों के साधना।
शास्त्रीय आधार
1त्याग का प्रतीक
वस्त्र = संसार, मोह, अहंकार का प्रतीक। वस्त्र त्यागना = सांसारिक बन्धनों से मुक्ति, अहंकार त्याग। साधक प्रकृति की मूल अवस्था में लौटता है — जैसे जन्म के समय।
2शक्ति साधना में
कुछ तांत्रिक साधनाओं (विशेषकर वामाचार/कौल मार्ग) में दिगम्बर अवस्था में जप, ध्यान, हवन का विधान है। देवी (विशेषकर काली, छिन्नमस्ता, तारा — दश महाविद्या) की कुछ साधनाएँ।
3अघोर परम्परा
अघोर साधक शिव के दिगम्बर रूप (नग्न/भस्म लेपित) की अनुकृति में साधना करते हैं।
4जैन दर्शन
दिगम्बर जैन सम्प्रदाय में भी संन्यासी निर्वस्त्र रहते हैं — परिग्रह त्याग का चरम रूप।
महत्वपूर्ण सावधानी
- ▸यह अत्यन्त उन्नत, गोपनीय और विशिष्ट साधना है।
- ▸सामान्य भक्तों/साधकों के लिए नहीं।
- ▸केवल गुरु आदेश और दीक्षा के बाद।
- ▸सामाजिक/कानूनी मर्यादा का ध्यान रखें — एकान्त स्थान में।
- ▸बिना अधिकार और परिपक्वता के करना हानिकारक।

