विस्तृत उत्तर
कपूर (Camphor/कर्पूर) तांत्रिक और सात्त्विक दोनों परम्पराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है:
विशेष उपयोग
- 1आरती (सर्वोच्च): कपूर से आरती = सर्वश्रेष्ठ। कपूर जलता है तो बिना कोई अवशेष छोड़े समाप्त हो जाता है = अहंकार का पूर्ण विनाश। 'जैसे कपूर जलकर शून्य हो जाता है, वैसे ही भक्त अहंकार त्यागकर ईश्वर में लीन हो जाता है।'
- 1वातावरण शुद्धि: कपूर जलाने से वायु शुद्ध होती है। जीवाणुनाशक, कीटनाशक गुण। गर्भगृह/पूजा स्थल शुद्धि हेतु।
- 1ध्यान सहायक: कपूर की सुगंध मस्तिष्क को शांत और एकाग्र करती है। मंत्र जप से पूर्व कपूर जलाना = एकाग्रता बढ़ती है।
- 1शिव पूजा: कपूर शिव को अत्यंत प्रिय है। 'कर्पूरगौरं करुणावतारम्...' — शिव कपूर के समान गौर (श्वेत) हैं। शिवलिंग पर कपूर जलाना = शिव प्रिय सेवा।
- 1तांत्रिक शुद्धि: तांत्रिक सामग्री (यंत्र, माला, रुद्राक्ष) की शुद्धि में कपूर धूप। नये भवन/दुकान में कपूर जलाना = वास्तु दोष शांति (लोक मान्यता)।
- 1नजर निवारण: कपूर + लौंग + गुग्गुल = धूप/धूनी → नकारात्मकता नाश।
वैज्ञानिक: कपूर = C₁₀H₁₆O। जलने पर CO₂ + H₂O = कोई विषैला अवशेष नहीं। एंटीसेप्टिक, एंटीफंगल, कीटनिरोधक। श्वास तंत्र को खोलता है।
सात्त्विक उपयोग: आरती, धूप, पूजा स्थल शुद्धि, शिव पूजा — ये सर्वसुलभ, सुरक्षित प्रयोग हैं।

