विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के लिए ऋतुओं का विशेष महत्व है।
सर्वोत्तम ऋतुएँ
1शरद ऋतु (अश्विन-कार्तिक — अक्टूबर-नवम्बर) — सर्वश्रेष्ठ
शारदीय नवरात्रि इसी ऋतु में — शक्ति साधना हेतु सर्वोत्तम। वातावरण शुद्ध, न अत्यधिक गर्म न ठण्डा। शरद पूर्णिमा + दीपावली = तंत्र साधना के सर्वाधिक शक्तिशाली काल।
2वसन्त ऋतु (चैत्र-वैशाख — मार्च-अप्रैल)
चैत्र नवरात्रि = शक्ति साधना। प्रकृति का जागरण काल — ऊर्जा प्रबल। अक्षय तृतीया, राम नवमी।
3ग्रीष्म ऋतु (ज्येष्ठ-आषाढ़)
कुछ उग्र तांत्रिक साधनाएँ (तप प्रधान) ग्रीष्म में — पंचाग्नि तप, सूर्य साधना।
विशेष काल (ऋतु से परे)
- ▸नवरात्रि (वर्ष में 4 बार — शारदीय सर्वप्रमुख)
- ▸दीपावली रात्रि
- ▸होली रात्रि
- ▸महाशिवरात्रि
- ▸ग्रहण काल
- ▸पूर्णिमा/अमावस्या
वर्जित/अनुपयुक्त
वर्षा ऋतु (श्रावण-भाद्रपद) = चातुर्मास — कुछ तांत्रिक साधनाएँ वर्जित (किन्तु शिव साधना श्रावण में उत्तम)। अत्यन्त शीत (पौष-माघ) = शारीरिक कठिनाई, किन्तु माघ स्नान/तप की अपनी परम्परा।
सारांश: शरद और वसन्त = सर्वोत्तम। नवरात्रि, दीपावली, होली, शिवरात्रि = विशेष अवसर। ऋतु से अधिक महत्वपूर्ण = साधक की तैयारी, गुरु आदेश, और नियमितता।

