विस्तृत उत्तर
पंचतत्व शुद्धि (भूत शुद्धि) तांत्रिक साधना का मूलभूत अंग है। शरीर पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) से बना है — इनकी शुद्धि से शरीर देवता पूजन योग्य बनता है।
पंचतत्व शुद्धि विधि
- 1पृथ्वी तत्व (मूलाधार चक्र):
मूलाधार (गुदा क्षेत्र) में ध्यान केन्द्रित करें। पीले वर्ण का ध्यान। बीज मंत्र: 'लं'। भावना: पृथ्वी तत्व शुद्ध हो रहा है — शरीर हल्का और शुद्ध।
- 1जल तत्व (स्वाधिष्ठान चक्र):
नाभि के नीचे ध्यान। श्वेत/चन्द्र वर्ण। बीज: 'वं'। भावना: जल तत्व शुद्ध — रक्त, रस शुद्ध।
- 1अग्नि तत्व (मणिपूर चक्र):
नाभि क्षेत्र। लाल/अग्नि वर्ण। बीज: 'रं'। भावना: अग्नि तत्व शुद्ध — पाचन, ऊर्जा शुद्ध।
- 1वायु तत्व (अनाहत चक्र):
हृदय क्षेत्र। धूम्र/हरा वर्ण। बीज: 'यं'। भावना: वायु तत्व शुद्ध — श्वास, प्राण शुद्ध।
- 1आकाश तत्व (विशुद्धि चक्र):
कण्ठ क्षेत्र। नीला/शून्य वर्ण। बीज: 'हं'। भावना: आकाश तत्व शुद्ध — मन, चेतना शुद्ध।
सम्पूर्ण विधि: प्रत्येक तत्व पर 5-5 मिनट ध्यान + बीज मंत्र जप → भावना: सम्पूर्ण शरीर शुद्ध → शिव/शक्ति रूप — 'देहो देवालयः प्रोक्तः जीवो देवः सनातनः।'
चेतावनी: उन्नत भूत शुद्धि गुरु मार्गदर्शन में ही करें। सामान्य साधक सरल ध्यान विधि (ऊपर बताई) से लाभ ले सकते हैं।