तंत्र में वीरभद्रासन और शवासन का क्या उपयोग है?
की चेकलिस्ट
शवासन: मृतक भाव (शरीर अहंकार त्याग), भूत शुद्धि, योग निद्रा, ऊर्जा एकीकरण। वीरभद्रासन: शिव रौद्र, शक्ति जागरण, भय नाश, 'वीर' श्रेणी (कुलार्णव)। सिद्धासन: कुंडलिनी।
- 1पीठ के बल लेटना = मृतक समान।
- 2तांत्रिक उपयोग: शव साधना, भूत शुद्धि — 'मैं मृत, अब पुनर्जन्म (शुद्ध)।' शरीर अहंकार त्याग।
- 3योग निद्रा = शवासन + ध्यान।
- 4साधना बाद = शवासन → ऊर्जा एकीकरण।
- 5वीरभद्र = शिव का रौद्र रूप (दक्ष यज्ञ)।
- 6तांत्रिक: शक्ति जागरण, भय नाश, मूलाधार+मणिपुर सक्रिय।
- 7वीर भाव = तांत्रिक साधक 'वीर' श्रेणी (कुलार्णव: पाशु→वीर→दिव्य)।
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श्रेणी
तंत्र साधना
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