विस्तृत उत्तर
माता तारा दस महाविद्याओं में दूसरी विद्या हैं। वे भयंकर विपत्तियों (भवसागर) से तारने वाली (पार लगाने वाली) देवी हैं। बौद्ध तंत्र और हिंदू तंत्र दोनों में माता तारा का अत्यंत उच्च स्थान है।
तारा देवी का सबसे शक्तिशाली एकाक्षरी (एक अक्षर का) बीज मंत्र 'स्त्रीं' (Streem) या कुछ परंपराओं में 'ह्रीं' या 'त्रीं' माना जाता है। इसे 'तारा बीज' कहते हैं। यह एकाक्षरी मंत्र ध्वनि का एक ऐसा विस्फोट है जो साधक के अज्ञान को नष्ट कर उसे तुरंत 'वाक् सिद्धि' (जो बोले वह सच हो जाए) और कवित्व शक्ति प्रदान करता है। इस मंत्र का जप मुख्य रूप से मध्यरात्रि में, नीले वस्त्र पहनकर और स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से किया जाता है। माता तारा की साधना आर्थिक संकटों और शत्रुओं का तुरंत नाश करती है।