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तंत्र साधना📜 तंत्र शास्त्र, आयुर्वेद, गीता1 मिनट पठन

तंत्र साधना में सात्विक आहार क्यों आवश्यक है?

संक्षिप्त उत्तर

गीता: सात्विक = आयु+बल+स्वास्थ्य। छांदोग्य: 'आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः' (शुद्ध भोजन=शुद्ध मन)। ऊर्जा↑, नाड़ी शुद्ध (कुंडलिनी)। दूध/घी/फल/अन्न। वर्जित: मांस/मदिरा/प्याज। वाम मार्ग: अपवाद।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना में सात्विक भोजन:

कारण

  1. 1गीता (17.8): सात्विक = 'आयुः सत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः' — आयु, बल, स्वास्थ्य, सुख बढ़ाने वाला।
  2. 2मन शुद्धि: 'आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः' (छांदोग्य उपनिषद) — शुद्ध भोजन = शुद्ध मन = मंत्र शक्तिशाली।
  3. 3ऊर्जा: सात्विक = सूक्ष्म ऊर्जा बढ़ती। तामसिक (मांस/मदिरा) = सूक्ष्म ऊर्जा कम।
  4. 4कुंडलिनी: शुद्ध नाड़ियां = कुंडलिनी मार्ग स्वच्छ। अशुद्ध = अवरोध।

सात्विक: दूध, घी, फल, सब्जी, अन्न, मेवा, शहद।

वर्जित: मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, बासी, अधिक तीखा/खट्टा।

अपवाद (वाम मार्ग): पंचमकार — किन्तु यह दीक्षित तांत्रिक हेतु, सामान्य नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, आयुर्वेद, गीता
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