विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना में सात्विक भोजन:
कारण
- 1गीता (17.8): सात्विक = 'आयुः सत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः' — आयु, बल, स्वास्थ्य, सुख बढ़ाने वाला।
- 2मन शुद्धि: 'आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः' (छांदोग्य उपनिषद) — शुद्ध भोजन = शुद्ध मन = मंत्र शक्तिशाली।
- 3ऊर्जा: सात्विक = सूक्ष्म ऊर्जा बढ़ती। तामसिक (मांस/मदिरा) = सूक्ष्म ऊर्जा कम।
- 4कुंडलिनी: शुद्ध नाड़ियां = कुंडलिनी मार्ग स्वच्छ। अशुद्ध = अवरोध।
सात्विक: दूध, घी, फल, सब्जी, अन्न, मेवा, शहद।
वर्जित: मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, बासी, अधिक तीखा/खट्टा।
अपवाद (वाम मार्ग): पंचमकार — किन्तु यह दीक्षित तांत्रिक हेतु, सामान्य नहीं।
