ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
तंत्र साधना📜 पतंजलि योग सूत्र (3.45), शिव पुराण, तंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

तंत्र साधना में अष्टसिद्धि का क्या वर्णन है?

संक्षिप्त उत्तर

8: अणिमा(सूक्ष्म), महिमा(विशाल), गरिमा(भारी), लघिमा(हल्का), प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व। कुंडलिनी→चक्र→सिद्धि। पतंजलि: 'सिद्धि = समाधि बाधा!' मोक्ष > सिद्धि।

📖

विस्तृत उत्तर

अष्टसिद्धि (8 महासिद्धि) — पतंजलि + तंत्र:

| सिद्धि | अर्थ |

|---------|------|

| अणिमा | अणु (सूक्ष्मतम) बनना |

| महिमा | विशाल (अनंत) बनना |

| गरिमा | अत्यंत भारी बनना |

| लघिमा | अत्यंत हल्का/उड़ना |

| प्राप्ति | कहीं से भी कुछ प्राप्त |

| प्राकाम्य | इच्छा मात्र से कार्य |

| ईशित्व | सर्व पर नियंत्रण |

| वशित्व | सभी को वश में |

तंत्र दृष्टि: कुंडलिनी जागरण → चक्रों पर सिद्धियां प्राप्त। सहस्रार = सर्वसिद्धि।

सावधानी: पतंजलि (3.37): 'ते समाधावुपसर्गा व्युत्थाने सिद्धयः।' — सिद्धियां = समाधि में बाधा! सिद्धि = उद्देश्य नहीं, मोक्ष = उद्देश्य।

📜
शास्त्रीय स्रोत
पतंजलि योग सूत्र (3.45), शिव पुराण, तंत्र शास्त्र
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

अष्टसिद्धि8सिद्धितंत्रवर्णन

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

तंत्र साधना में अष्टसिद्धि का क्या वर्णन है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको तंत्र साधना से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर पतंजलि योग सूत्र (3.45), शिव पुराण, तंत्र शास्त्र पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।