लोकमहर्लोक में अष्टसिद्धियों की क्या भूमिका है?महर्लोक के निवासियों के पास अणिमा, महिमा आदि अष्टसिद्धियाँ हैं जिनसे वे ब्रह्मांड के किसी भी लोक में मन की गति से जा सकते हैं। प्रलय में ये सिद्धियाँ ही उन्हें जनलोक भेजती हैं।#अष्टसिद्धि#महर्लोक#अणिमा
तंत्र सिद्धिअणिमा सिद्धि प्राप्त करने का तांत्रिक विधान क्या है?पतंजलि: पंचभूत संयम → अणिमा। तांत्रिक: कुंडलिनी 7 चक्र → सहस्रार। आध्यात्मिक: अहंकार शून्य = सच्ची अणिमा। **चेतावनी: 'सिद्धि = समाधि बाधा!'** मोक्ष > सिद्धि। गुरु+गोपनीय।#अणिमा
उत्पत्ति की कथामाँ कूष्मांडा ने त्रिदेव को क्या दायित्व सौंपे?माँ कूष्मांडा ने त्रिदेव को दायित्व: ब्रह्मा = सृष्टि रचना। विष्णु = पालन। महेश = संहार। इसके अतिरिक्त: अष्टसिद्धि और नौ निधियों की दाता।#त्रिदेव दायित्व#ब्रह्मा विष्णु महेश#सृष्टि पालन संहार
तंत्र साधनातंत्र साधना के दौरान सिद्धि कैसे प्राप्त होती है?महानिर्वाण: सिद्धि = साधना + मंत्र-शक्ति + साधक-पात्रता + गुरु-कृपा — चारों का संयोग। प्रकार: मंत्र-सिद्धि (आधार), अष्टसिद्धि (अणिमा-महिमा आदि), वाक्-सिद्धि, त्रिकाल-दर्शन। पाँच चरण: दीक्षा → पुरश्चरण → नियम → ध्यान-जप → गुरु-कृपा। सिद्धि का दुरुपयोग = नाश।#तंत्र सिद्धि#अष्टसिद्धि#मंत्र सिद्धि
तंत्र साधनातंत्र साधना में अष्टसिद्धि का क्या वर्णन है?8: अणिमा(सूक्ष्म), महिमा(विशाल), गरिमा(भारी), लघिमा(हल्का), प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व। कुंडलिनी→चक्र→सिद्धि। पतंजलि: 'सिद्धि = समाधि बाधा!' मोक्ष > सिद्धि।#अष्टसिद्धि#8#सिद्धि