विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना में भोग का विधान — सामान्य पूजा से भिन्न और विशेष:
महानिर्वाण तंत्र — भोग का सिद्धांत
देवताप्रीतये भोगः साधकस्य सिद्धये।
देवतानुसारेण भोगः प्रदातव्यः सदा बुधैः।।'
— देवता की प्रीति और साधक की सिद्धि के लिए — देवता-अनुसार भोग देना चाहिए।
तांत्रिक देवताओं का भोग — विस्तृत विधान
1महाकाली / उग्र काली
कालीकुल तंत्र:
- ▸लाल गुड़हल के पुष्प + मद्य (वामाचार परंपरा में — परंतु यह 'वीरमार्ग' है)
- ▸सामान्य साधक के लिए: लाल मिठाई, पान, नारियल
- ▸रात्रि-साधना में: काला तिल, मसाला पान
2बटुकभैरव / कालभैरव
भैरव तंत्र:
- ▸उड़द की दाल (भुनी हुई), तिल के लड्डू
- ▸सरसों के तेल का दीपक + भोग
- ▸मदिरा (उग्र परंपरा — गुरु-मार्गदर्शन में)
- ▸सामान्य: मेथी के लड्डू, उड़द
3त्रिपुरसुंदरी / ललिता
श्री विद्या परंपरा:
- ▸खीर (श्वेत — पंचदशी साधना में)
- ▸पान-सुपारी, मिष्ठान्न
- ▸नारियल, केला, सफेद मिठाई
- ▸चंदन का लेप
4तारा
तारा तंत्र:
- ▸मछली (वामाचारी परंपरा में)
- ▸सामान्य: खिचड़ी, नीले फूल, तिल
5छिन्नमस्ता
शारदातिलक: खीर, लाल चावल, नारियल
6धूमावती
सामान्य अन्न — सूखी रोटी, चना
भोग चढ़ाने की तांत्रिक विधि
- 1भोग स्वयं बनाएं — बाज़ार का नहीं
- 2मंत्र पढ़ते हुए अर्पण करें: 'ॐ [देवनाम] नैवेद्यं समर्पयामि'
- 3भोग पर मंत्र-जल छिड़कें
- 4साधना के बाद प्रसाद रूप में ग्रहण करें — या नदी-प्रवाह करें
सामान्य नियम
कुलार्णव: 'साधकः स्वयं पक्वं भोगं दद्यात्।' — साधक स्वयं पका भोग दे। दूसरे के हाथ का भोग तांत्रिक साधना में उचित नहीं।